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BNS की धारा 285 सार्वजनिक मार्ग या जलमार्ग में दुर्घटना

BNS की धारा 285 सार्वजनिक मार्ग या जलमार्ग में दुर्घटना
काल्पनिक चित्र 


धारा 285 का पूरा टेक्स्ट (Bare Act)

(लोक मार्ग या नौपरिवहन पथ में संकट या बाधा)

 जो कोई किसी कार्य को करके या अपने कब्जे में की, या अपने भार-साधन के अधीन किसी संपत्ति की व्यवस्था करने का लोप करने के द्वारा, किसी लोकमार्ग या नौपरिवहन के लोक पथ में किसी व्यक्ति को संकट, बाधा या क्षति कारित करेगा वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।


धारा 285 BNS (भारतीय न्याय संहिता, 2023) :- 
यह सेक्शन किसी भी ऐसे काम या चूक को रोकने के लिए बनाया गया है जो पब्लिक सड़कों या जलमार्गों पर खतरा, रुकावट या चोट का जोखिम पैदा करता है। यह सेक्शन तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर या लापरवाही से ऐसी स्थिति पैदा करता है जो जनता को खतरे में डालती है या उन्हें नुकसान, असुविधा या दुर्घटना का जोखिम पहुंचाती है।


धारा 285 का सरल अर्थ :- 
1. सार्वजनिक सड़कों और जलमार्गों की सुरक्षा करना
यह सुनिश्चित करना कि लोगों की आवाजाही और नेविगेशन में कोई रुकावट न आए

2 . लापरवाही या बिना चेतावनी के पैदा हुई खतरनाक स्थितियों के खिलाफ कार्रवाई करना

3 . यह कानून उन सभी कामों पर लागू होता है जिनमें कोई व्यक्ति कार्रवाई करके या किसी खतरे को ठीक न करके सार्वजनिक जीवन को बाधित करता है।


धारा 285 कब अपराध बनती है ? :- 
धारा 285 इन तरह के मामलों में लागू हो सकती है- 
सड़क के बीच में बड़ी मात्रा में कचरा या कंस्ट्रक्शन का सामान इस तरह छोड़ना जिससे ट्रैफिक में रुकावट आए।

नदी या नहर में नाव को ठीक से सुरक्षित न करना, जिससे नेविगेशन के लिए खतरा पैदा हो।

बिना चेतावनी के किसी सार्वजनिक रास्ते पर खंभा, पाइप या कोई दूसरी चीज़ रखना, जिससे राहगीरों को चोट लग सकती है।


धारा 285 का उद्देश्य :- 
धारा 285 का मुख्य लक्ष्य है -
1 . सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाना
2 . आम लोगों को बिना खतरा और बिना अवरोध के मार्ग और जलमार्ग उपलब्ध कराना
3 . अनैतिक या जोखिम भरे व्यवहार के लिए जवाबदेही तय करना


दंड और सजा :- 

सजा:- 5,000 रुपए का जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नहीं किया जा सकता हैं।

इसमें क़ैद की सजा नहीं है, केवल मौद्रिक दंड का प्रावधान है।


धारा 285 का तुलनात्मक संदर्भ (पुराना IPC के साथ) :- 
पुराने Indian Penal Code (IPC) की धारा 283 इसी विषय पर थी, जिसमें जुर्माना केवल ₹200 तक था। अब BNS के तहत इसे अपडेट कर ₹5,000 तक जुर्माना किया गया है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाया गया है।


निष्कर्ष :- 
BNS की धारा 285 एक आसान लेकिन बहुत ज़रूरी प्रावधान है जिसका मकसद बिना किसी रुकावट और सुरक्षित सार्वजनिक जीवन सुनिश्चित करना है। चाहे सड़क हो या जलमार्ग, इस धारा के तहत कोई भी रुकावट या खतरा पैदा करना दंडनीय अपराध है। इस प्रावधान का पालन करने से न सिर्फ कानूनी सज़ा से बचा जा सकता है, बल्कि समाज में एक सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल बनाने में भी मदद मिलती है।


(IPC) की धारा 283 को (BNS) की धारा 285 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है


(IPC) की धारा 283 को (BNS) की धारा 285 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है


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अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है



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